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भोजपुरी सिंगर व एक्ट्रेस देवी इन दिनों डायरी लिखने में बिजी हैं. गौरतलब है कि देवी अपने मन की बात लिखती रही हैं, अब वे इसे फेसबुक पर पोस्ट भी करती रहती हैं. देवी ने अब तक सैकड़ों गाने गाये हैं, जो लोगों की जुबान पर छाये. अब भी देवी के गाने सुनने वालों का क्रेज बरकरार है, तभी तो स्टेज शो के दौरान लाखों की भीड़ देखी जाती है.
देवी ने अपने हालिया पोस्ट में लिखा है कि व्यर्थ की सजावट से कभी-कभी सुंदरता नष्ट हो जाती है. यदि कोई ताजमहल को सजाने लगे, उसपर फूलों का गुलदस्ता चिपका दे, या उसे रंग-बिरंगे पेंट से रंग डाले तो ताजमहल की सुंदरता समाप्त हो जाएगी. ताजमहल खुद में एक मुकम्मल सुंदरता है. उसको अधिक सुन्दर बनाने का प्रयास शायद मूर्खता कही जाएगी. हम अक्सर ही सजावट के नाम पर सुंदरता को नष्ट कर देते हैं. शादी के मौसम में दूल्हे को ले जाने वाली कार पर चारों तरफ फूल माला आदि सजावट के रूप में झूलती रहती है. कुछ कागज या प्लास्टिक के रंगीन झालर भी लटके रहते हैं. कार का शीशा और कार, सजावटी चीजों से ढंक सा जाता है. क्या कार को फूल या पत्ते चिपकाकर हम अधिक सुन्दर बना सकते हैं ? यदि नहीं तो फिर यह फालतू की मेहनत क्यों? कार बनाने वाले तो कार को सुन्दरतम समझ के ही बाजार में उतारते हैं.
सुंदरता एक बड़ी ही नाजुक चीज होती है. हलकी सी गलत छुवन उसे क्षत विक्षत कर सकती है. सुंदरता की समझ सभी में होती भी नहीं. ज्यादातर लोग इस प्रकृति की सुंदरता को नष्ट करने में ही लगे हैं. एक झील की सुंदरता को वहां फेका हुआ बिसलेरी पानी का एक खाली बोतल समाप्त कर देता है. और यदि वहां हल्दीराम की भुजिया का चार खाली पन्नी फेक दिया जाये तो फिर सबकुछ समाप्त ही समझिये. आजकल मैं जब पहाड़ों पर जाती हूँ तो सडकों के किनारे छोटी छोटी दुकानों में भुजिया और चिप्स की चमकीली पैकटें बड़ी संख्या में लटकी देखती हूँ मुझे बड़ी घबराहट होती है. पांच रुपये की भुजिया खाने के बाद जो खाली पैकेट को कहीं भी फेक देते हैं, यह सब क्या है? मैं पहाड़ों में काफी दूर तक ऐसी जगह चली जाती हूँ जहाँ यह सब न दिखे.

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